कल रात साढ़े सात वर्ष की युक्ति अग्रवाल मेरे यहां मेहमान थी। बहुत ही बातूनी। आत्म विश्वास गजब का। सोच बहुत ही ऊंची और स्पष्ट। इधर मेरी स्टडी टेबल पर आत्मानुभूति मंच द्वारा बच्चों के सामान्य ज्ञान को परखने के लिए बनाया गया एक प्रश्न पत्र था। उक्ति उसे लेकर आई की नानू मुझे इसके आखिरी प्रश्न का उत्तर पता है। उसका जवाब मुझे इतना अच्छा लगा की इस वीडियो बनाने के लिए मजबूर हो गया। युक्ति
संदेश
सकारात्मक सोच
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मेडीकल साइंस की भाषा में SNS सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम का शार्ट फार्म है। SNS हार्ट रेट व ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, खून की नलियों को सकरा करता है। जब हम चिंता ग्रस्त होते हैं, डरे हुए होते हैं, निराश होते हैं तो SNS की स्थिति में होते हैं। जैसे कि हम मन में सोच लें कि हमारी बीमारी ठीक नहीं होगी तब SNS अपना प्रभाव दिखाता है। आपकी बीमारी को ठीक नहीं होने देता। दवा भी पूरा असर नहीं करती है। इसका विलोम शब्द PSNS यानी पेरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम है जो SNS के प्रभाव को उलटी दिशा में मोड़ देता है। आपकी बीमारी तेजी से ठीक होती है। इसीलिए कहा जाता है कि पॉजिटिव सोच रखें। इसीलिए कहा जाता है डॉक्टर को दिखा देने मात्र से आधी बीमारी ठीक हो जाती है। क्योंकि हमारी सोच कहती है कि अब हम ठीक होने जा रहे हैं। तो कोई भी बीमारी हो मन में विश्वास रखें कि भगवान का बनाया सुरक्षा तंत्र उससे निपट लेगा। इसी विश्वास जिसे हम विल पॉवर भी कह सकते हैं जिसके चलते कई लोग गंभीर व असाध्य रोगों पर भी विजय प्राप्त कर लेते हैं। मैं कोई मेडीकल विशेषज्ञ नहीं हूँ इसलिए इस संदेश में कोई टेक्नीकल खामी न ढूंढ कर पसंद करन...
यंत्र पूजा
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यंत्र पूजा एक फेसबुक के मित्र में पुरानी कार को टा टा बाय बाय करते हुए नई नवेली कार ली। फिर मंदिर जाकर उसकी विधिवत पूजा भी करवाई। मन में विचार आया कि जब गाड़ी के बीमा का हर साल नवीनीकरण होता है तो उसी तर्ज पर कार की पूजा भी हर बार साल में एक बार होनी चाहिए। आखिर एक बार की पूजा में इतनी कितनी ताकत होगी कि कार के खटारा होने तक प्रभावी रहे। मेरी मानिए हर बार जब बीमे का नवीनीकरण करवाओ कार की पूजा भी करवा लो। यदि इस उपाय को लोग अपनाएं तो वाहन दुर्घटनाओं में भारी कमी आ जाएगी।
मजदूर दिवस
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मजदूर दिवस पर सभी मेहनतकश इंसानों के लिए तालियां। उन्हें गरीबी या अमीरी की तराजू में नहीं तोला जाना चाहिए। गरीब यदि अपने स्टेटस से खुश है, आत्मसम्मान से जी रहा है तो उसे बेचारा समझने का हमें क्या हक है। वह रोज कमाता रोज खाता है। नहीं मिलता तो आराम से भूखा सोकर फलाहार रहित सौ टका शुद्ध उपवास कर लेता है और कल की चिंता से दूर रात मीठी नींद सोता है। किसी को वजन उठवाना तो तो वह मजदूर की मिन्नत करता है कि उस काम को कर दे। बताइए उस वक्त बेचारा कौन हुआ। दूसरी और अनेक अमीर हैं जो पूरे दिन मानसिक के साथ हाड़ तोड़ शारीरिक श्रम भी करते हैं वह भी अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए, देश के लिए, वे भी किसी मजदूर से कम नहीं। किसी कंपनी का वाइस प्रेसीडेंट पत्नी के आदेश पर यदि किचन में स्टूल पर खड़ा होकर ऊपरी केबिनेट से दाल का कनस्तर उतार रहा है तो वह भी तो उस पल मजदूरी ही तो कर रहा है। स्त्री शक्ति तो मानो मजदूरी करने के लिए ही जन्म लेती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अपवाद को छोड़ दें जहां इनपर ज्यादतियां हुई, उन्होंने अपने इस स्टेटस के प्रति मन में असंतोष नहीं रखा और परिवार की गाड़ी का द...
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ठेकेदार नहीं एक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट कल दिनांक 2 मई यानि 1 मई मजदूर दिवस को सलामी देने के पश्चात श्री रामनारायण कुमावत ठेकेदार असमय देवलोक गमन कर गए। आप एक सिविल कांट्रेक्टर थे तथा उन्होंने अपने जीवन में कई बड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट किए थे। उत्तम क्वालिटी का काम तथा अबाधित सेवा देना उनकी विशेषता थी। मैं उनके संपर्क में 1998 में आया जब उन्होंने इंद्रप्रस्थ चौराहे पर स्थित लाभगंगा बिल्डिंग का कार्य अपने हाथों में लिया। कम्प्यूटर प्रोफेशनल के रूप में अपने करिअर के उतार के समय इसी समय मैंने एडमिनिस्ट्रेशन व प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में प्रवेश किया। रामनारायण जी के साथ मैंने अपने इस पहले प्रोजेक्ट को समय, गुणवत्ता व लागत की दृष्टि से इतने बेहतर तरीके से पूर्ण किया की मुझे अपनी कंपनी सुवि इंफरमेशन सिस्टम ने बेस्ट सुवियन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड तथा एक माह का वेतन दिया। उसके बाद मैने कंपनी तथा नई दुनिया के लिए अनेकों ड्रीम प्रोजेक्ट किए जिनमें रामनारायण जी या उनका परिवार सहभागी रहा। मुझ कम्प्यूटर के ए सी रूम में बैठने वाले व्यक्ति को खुले आसमान और धूप में साईट पर काम देखने, गुमटी ...
आह! वो गर्मियों की छुट्टियां।
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आह! वो गर्मियों की छुट्टियां घर से निकल कर सौ मीटर दूर मेडिकल स्टोर तक गया की तेज धूप और गर्मी से जान निकल गई। तभी देखा की एक मां अपनी पांच छः वर्ष की थकी हुई नन्हीं सी जान को छतरी की छाया में घर लेकर जा रही थी। वहीं दूसरी और एक पिता अपनी बाइक पर दो पस्त लग रहे नन्हें बच्चों को कोचिंग से निकाल कर घर ले जा रहा था। मुझे याद आए बचपन के वे दिन जब मार्च अप्रैल में परीक्षा होते ही बस्ता किसी कोने या टांड़ पर और पूरे दो ढाई महीने बस खाना, पीना, खेलना, कूदना, घूमना, नाना मामा के यहां छुट्टियां मनाने जाना। जिंदगी का आनंद आ जाता था। अपने दिन भूलकर अब हम कितने क्रूर गए हैं की अपने जिगर् के टुकड़ों को जरा सा चेन नहीं लेने देते। तिस पर भी मैने ऐसे मां बाप देखे हैं जो पढ़ने के लिए या कम नंबर लाने के लिए बच्चे को कचोटते ही रहते हैं। पर यह n सोचिएगा की आपको इस अपराध की माफ़ी मिल जाएगी। गर्मियों की दो माह की छुट्टियों को नाना मामा दादा दादी भाई बहनों के साथ बिताकर बच्चा जो संस्कार पाता था वे संस्कार उसे नही मिल रहे। बड़ा होकर जब वह अपनी गृहस्थी दूर कहीं अलग बसा ले और आपको अपने जी...
विवाह की 45 वीं वर्षगांठ
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आज 19 मई मेरे जीवन का महत्वपूर्ण दिन है। आज मेरी और मेरी प्रिय पत्नी निर्मला के शुभ विवाह की तारीख है। आज ही मेरे जीवन के एक पहिए का साथ देने के लिए दूसरा मिला। यदि यह तारीख मिस हो जाती तो फिर पता नहीं कितनी तारीख पर तारीख मिलती। सर्व प्रथम मेरी और से उन सभी सुखी जीवन बिता रहे दंपत्तियों को विवाह की वर्षगांठ की शुभकामनाएं जो आज की ही तारीख को फेरे लेकर दाम्पत्य जीवन के फेर में पड़े थे। उनमें से एक मेरे भांजे पंकज मोदी सीहोर, कार्यालयीन साथी संजय वर्मा तथा सिक्योरिटी कांट्रेक्टर राजेश तथा फेब्रीकेशन कांट्रेक्टर विवेक भाले जी हैं। सुखी दांपत्य जीवन के कई मंत्र है जो इस क्षेत्र के विद्वान लोग बताते रहते हैं। उनमें से मुझे जो समझ आया वह यह है कि जीवन में ठेले की तरह दो के स्थान पर चार पहिए हो तो वह अधिक भार उठा सकता है, सुगमता से बिना लुढ़के या फिसले आगे बढ़ता रह सकता है। पति पत्नी तो जीवन के दो पहिए हैं ही पर वे दूसरे दो पहिए पति और पत्नी के परिवार होते हैं। यदि इस दोनों परिवारों का सहयोग, समर्थन, प्यार और आशीर्वाद मिले तो सुखद दांपत्य जीवन क...