ठेकेदार नहीं एक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट
कल दिनांक 2 मई यानि 1 मई मजदूर दिवस को सलामी देने के पश्चात श्री रामनारायण कुमावत ठेकेदार असमय देवलोक गमन कर गए। आप एक सिविल कांट्रेक्टर थे तथा उन्होंने अपने जीवन में कई बड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट किए थे। उत्तम क्वालिटी का काम तथा अबाधित सेवा देना उनकी विशेषता थी।
मैं उनके संपर्क में 1998 में आया जब उन्होंने इंद्रप्रस्थ चौराहे पर स्थित लाभगंगा बिल्डिंग का कार्य अपने हाथों में लिया। कम्प्यूटर प्रोफेशनल के रूप में अपने करिअर के उतार के समय इसी समय मैंने एडमिनिस्ट्रेशन व प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में प्रवेश किया। रामनारायण जी के साथ मैंने अपने इस पहले प्रोजेक्ट को समय, गुणवत्ता व लागत की दृष्टि से इतने बेहतर तरीके से पूर्ण किया की मुझे अपनी कंपनी सुवि इंफरमेशन सिस्टम ने बेस्ट सुवियन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड तथा एक माह का वेतन दिया। उसके बाद मैने कंपनी तथा नई दुनिया के लिए अनेकों ड्रीम प्रोजेक्ट किए जिनमें रामनारायण जी या उनका परिवार सहभागी रहा। मुझ कम्प्यूटर के ए सी रूम में बैठने वाले व्यक्ति को खुले आसमान और धूप में साईट पर काम देखने, गुमटी पर कट चाय पीने में मजा भी आया और काफी सीखने को भी मिला।
देश की यह एक विडंबना है कि ठेकेदार शब्द का नाम जुबां पर आते ही उसकी एक नकारात्मक छवि मन में आती है जिसके एक और इंजीनियरों तथा ठेका अधिकारियों से गठबंधन व दूसरी और उनके द्वारा मजदूरों के शोषण की बात आती है। कुछ हद तक यह आरोप सही भी हो सकता है पर मोटे तौर पर देखा जाए तो ये ठेकेदार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के बड़े रहनुमा होते हैं। उन्हें रोजी रोटी देते है, जरूरत पड़ने पर अग्रिम आर्थिक सहायता देते हैं, सुख दुख के सहभागी बनते हैं। कई बार यह अग्रिम राशि डूब जाती है जब मजदूर बिना बताए दूसरे ठेकेदार के पास या गांव चला जाता है।
सबसे बड़ी बात यह है की ये ठेकेदार चलते फिरते ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट होते हैं जो अकुशल मजदूरों को काम सिखाकर कुशल मजदूर बना देते हैं। ऐसे उदाहरण आम हैं जहाँ इन ठेकेदारों से काम सीखकर निकले लोग खुद ठेकेदार बन गए चाहे वे सिविल के हों या पेंटर, या कारपेंटर, या पी ओ पी, या प्लंबर।
भवन निर्माण क्षेत्र में कुमावत बिरादरी के लोग बड़ी सेवा देते आए हैं। मैने रामनारायण जी, उनके बच्चों व रिश्तेदारों व अन्य को खुद मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ काम करते और उन्हें प्रेरित करते देखा है।
रामनारायण ठेकेदार जी जिन्होंने अपने जीवन में हजारों छतें भरी खुद उनकी छ्तछाया उनके परिवार से उठ गई।
ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दे तथा परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
ॐ शांति।
महेंद्र सांघी
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