विवाह की 45 वीं वर्षगांठ

 आज 19 मई मेरे जीवन का महत्वपूर्ण दिन है। आज मेरी और मेरी प्रिय पत्नी निर्मला के शुभ विवाह की तारीख है। आज ही मेरे जीवन के एक पहिए का साथ देने के लिए दूसरा मिला।  यदि  यह तारीख  मिस हो जाती तो फिर  पता नहीं कितनी तारीख पर तारीख मिलती। 

सर्व प्रथम मेरी और से उन सभी सुखी जीवन बिता रहे दंपत्तियों को विवाह की वर्षगांठ की शुभकामनाएं जो आज की ही तारीख को फेरे लेकर दाम्पत्य जीवन के फेर में पड़े थे। उनमें से एक मेरे भांजे पंकज मोदी सीहोर, कार्यालयीन साथी संजय वर्मा तथा सिक्योरिटी कांट्रेक्टर राजेश तथा फेब्रीकेशन कांट्रेक्टर विवेक भाले जी हैं। 

 सुखी दांपत्य जीवन के कई मंत्र है जो इस क्षेत्र के विद्वान लोग बताते रहते हैं। उनमें से मुझे जो समझ आया वह यह है कि जीवन में ठेले की तरह दो के स्थान पर चार पहिए हो तो वह अधिक भार उठा सकता है, सुगमता से बिना लुढ़के या फिसले आगे बढ़ता रह सकता है। पति पत्नी तो जीवन के दो पहिए हैं ही पर वे दूसरे दो पहिए पति और पत्नी के परिवार होते हैं। यदि इस दोनों परिवारों का सहयोग, समर्थन, प्यार और आशीर्वाद मिले तो सुखद दांपत्य जीवन का बीमा बन जाता है। 

मुझे अपने भरे पूरे परिवार का आशीर्वाद तो मिला ही पर निर्मला के परिवार का भी अभूतपूर्व साथ व सम्मान मिला। जीवन के अभावों व संघर्ष के दिनों में भी मेरे ससुराल परिवार ने कभी हमारे जीवन में तिनके बराबर भी दखल नहीं दिया। 

पोस्ट लंबी हो रही है पर एक बात का जिक्र करना प्रेरक होगा। मेरे ससुराल पक्ष आइल मिल वाले थे और हम नौकरी पेशा। विवाह के एक माह बाद ही निर्मला ने पीहर में बताया की ससुराल में तो दो दो किलो मूंगफली तेल आता है, अपने यहां टैंक भरा रहता है। मेरे दादा ससुर ने कहा की चार डब्बे भिजवा देता हूं। बिना पड़ी लिखी पर दूरदर्शी दादी सास ने कहा खबरदार। आज भेज दोगे कल क्या। अब वही तुम्हारा घर है। जो और जितना वे खुद खा रहे हैं वही तो तुम्हें भी खिला रहे हैं। भूखा तो नहीं रख रहे। आज के बाद अपने ससुराल की बात यहां मत करना। आज की पीढ़ी को इस मंत्र को अपनाना चाहिए।

मेरे जीवन की गाड़ी को चार पहिए मिलने के बाद वह  सुगमता से आगे लुड़क रहा है। ईश्वर ने जिस तरह मुझे ठेला बक्शा उसी तरह  सबको बक्शे। 

अन्य कवि अक्सर अपनी जीवन संगिनी का मजाक उड़ाते नजर आते हैं, मैने अपने प्रथम काव्य संकलन ’ठेला’ की एक से अधिक कविताओं में अपनी जीवन संगिनी निर्मला के प्रति आभार व्यक्त किया है। 

उन्हें मेरी और से 45 वीं बार धन्यवाद, अभिनंदन। 


चित्र ससुराल में हालिया संपन्न एक मंगल कार्य के हवन का।

महेंद्र कुमार सांघी ’दद्दू’

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