अखबार के मुख पृष्ठ पर पंचायत
आज दिनांक 20 मई 2022 के नईदुनिया समाचार पत्र के मुख पृष्ठ ने अलसुबह चौंका दिया। शीर्षक ’ पंचायत स्पेशल एडिशन’ देखकर प्रथमदृष्टया लगा कि चूंकि पंचायत चुनाव आ रहे हैं इसलिए अखबार का कोई नया (सुखद) प्रयोग है। सामान्यतः मेरी आदत सीधे तीसरे पृष्ठ पर कूदने की होती है क्योंकि पहले दो पृष्ठ फुल पेज विज्ञापन होते हैं जो 70 पार इंसान के किसी काम के नहीं होते।
पृष्ठ को रोचक खबरों से सजाया गया है जो किसी ग्राम पंचायत का प्रमोशन लग रही थी। मुख्य खबर की बोल्ड हेडलाइंस ’फुलेरा को लगी पांच नई आंखें’ मजेदार लगी। ऐसा महसूस हो रहा था की मानो किसी बच्चे को एक दिन के लिए संपादक बना दिया गया हो। अखबार के प्रति सम्मान के भाव रिसने लगे। एक एक खबर को गौर से पढ़ा और उसका आनंद लिया।
खबरों में से बस एक विज्ञापन था जिससे असहमति हुई। वह थी एक ग्रेजुएट लड़की के लिए वर की तलाश। गांव की नब्ज देखने में यहां त्रुटि हो गई। विज्ञापन लड़के की और से होना चाहिए था जो भूसे के ढेर में सुई की तरह लड़की की तलाश कर रहा हो। आज की स्थिति यह है कि कोई लड़की गांव में विवाह कर बसना नहीं चाहती चाहे गांव उन्नति की और अग्रसर हो, वर पक्ष संपन्न हो, कार, मकान, एसी, फ्रिज सब घर में हो, अच्छा भला व्यवसाय हो। लड़का उच्च शिक्षित हो। पर नहीं उसे तो बड़े शहर का ही लड़का चाहिए। हां उसे गावों में उपजे अनाज से बनी डिशेज से परहेज नहीं। खैर यह एक अलग पोस्ट का विषय है, इसे ट्रेलर समझ कर यहीं छोड़ दें।
पर विश्वास नहीं हो रहा था कि देश का कोई ग्राम राष्ट्रीय अखबार के मुखपृष्ठ पर छा जाए। बांचते बांचते अंतिम लाइन में छपे डिस्क्लेमर पर पड़ी। लिखा था यह एक विज्ञापन है इसका पंचायत समिति फुलेरा से कोई संबंध नहीं है।
यानि ऊपर प्रधान जी, प्रधान पति, सचिव आदि के जो फोटू छापे गए वे अभिनेता (मॉडल) निकले।
सम्मान की रिसन अचानक रुक गई। निराशा हुई कि विज्ञापन भी था तो किसी उत्कृष्ट ग्राम पंचायत की असली प्रगति और समस्याओं को दिखाया जा सकता था।
इस विज्ञापन को किसने जारी किया और किस उद्देश्य से इसका उत्तर अगले पृष्ठ पर मिला। यह प्राईम वीडियो के सीरियल पंचायत का विज्ञापन था। कई सीरियल कितना समय बर्बाद करते हैं यह तो सभी को पता है यहां तो प्रमोशन के विज्ञापन ने ही समय खोटी कर दिया।
रुकिए ट्विस्ट अभी बाकी है। दूसरे पृष्ठ के कोने में चेतावनी छपी है सीरियल À श्रेणी का यानि वयस्कों के लिए है। पंचायत को दिखाना है तो केवल वयस्कों के लिए क्यों।
हमारे शहर बिगड़ चुके हैं। शायद अब आधुनिकता के जहर को पंचायतों तक पहुंचाने की तैयारी है। नए बाजार का शिकार करना है। क्या उम्मीद करें कि इसमें गालियां नहीं होगी जो ग्रामीण संस्कृति को दूषित करे।
मेरी आशंका सच है या निर्मूल यह तो वक्त बताएगा।
मालगुड़ी डेज जैसे साफ सुथरे सीरियल्स के डेज लद चुके हैं।
पोस्ट पसंद आए तो विमर्श करें।
महेंद्र सांघी ’दद्दू’
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